कौन हूँ मैं

एक तालाब में कैद मछली हूँ मैं,

अँधेरे में कहीं गुम,

कठपुतली हूँ मैं,

कौन नचा रहा ,

कौन नाच रहा ,

इसकी फ़िक्र किसे है ,

बस अपने पात्र में ,

कहीं गुम एक अभिनेता हूँ मैं ।

एक कविता है जो मेरे सरे रूपों को वास्तविकता से मिलती है , मेरी ही वाणी में पूरी कविता सुनने के लिए नीचे की वीडियो देखें। अच्छी लगे तो LIke एंड Subscribe करें , और हाँ क्रिटिकल comments जरूर करें ।

 

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2 comments

  1. एक तालाब में कैद मछली हूँ मैं,

    अँधेरे में कहीं गुम,

    कठपुतली हूँ मैं,

    अच्छा लगा पढ़कर

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