और एक मुस्कान – 2

“और एक मुस्कान ” रात के स्वप्न में प्रारम्भ हुई इस कविता का ,इस अंक में , मैं अरुणोदय से मिलाप करा रहा हूँ , जहाँ एक नयी मुस्कान ने जन्म लिया है।

जीवन बाँटने के लिए एक जीवन…

आस बटोहती आँखें ,

एक खुला हुआ हाथ , एक बढ़ा हुआ हाथ ,

एक बूँद पानी ,

मुस्काते हुए होंठ ,

तृप्त होने का एहसास ,

अरुणोदय की गर्माहट ,

कलियों की खिलखिलाहट ,

और एक मुस्कान…

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