कि तुम भी एक पहचान हो!!

DTU Times

By: Ankur Shukla, 3rd Year, ME

self-belief

ज़िन्दगी की राहों में आगे तो बढ़ जायेंगे ,
बस आप को याद करते जायेंगे।
कहाँ से चले थे ,
इसकी किसे खबर ,
बस आपसे मिले ,
और कुछ पल में आसमां पर थे।
क्या किया आपने ,
जो हममें विश्वास आया ,
कुछ कर दिखाने का अहसास आया।
आज याद करता हूँ वह समय ,
तो मस्तिष्क में उभरते हैं वे शब्द ,
कर्कश तीरों की  तरह चुभते थे हृदय पर ,
ये अहसास तो था ही न मुझमें ,
कि एक दिन ज्ञात होगा ,
वे कर्कश तीर नहीं , नीर हैं,
जो हमें उस ऊँचाई  पर पहुँचा रहा है ,
मीठा अमृत है ,
वो तक़दीर नहीं ,
आपकी मेहनत है ,
जो हममें आग जलाती है ,
अंधकार की  लौ बुझाती  है ,
हमें विश्वास दिलाती है,
कि तुमही हो ,
भूलजाओ दुनिया , संसार को ,
अपने लिए…

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