अभी तो आये थे ,

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This poem is devoted to my all beloved seniors , Farewell!!!

अभी तो आये थे ,

अभी जाना हो गया ,

फिर से जैसे नयी ज़िन्दगी का बहाना हो गया । 

 

अंतिम वर्ष , कॉलेज का आखिरी साल ,

 रोमांचकता से भरपूर पर अब कुछ अजीब सा लगता है ।

 ख़ुशीभीहैऔरदुःखभीपरऐसाक्यों।

ये चार साल जिनकी यादें भुलाई नहीं जा सकती ,

 बस यही ख़त्म होने कि कगार पर हैं ,

 ये दोस्त जिनके साथ मैंने ज़िन्दगी का सबसे अच्छा समय बिताया ,

 इनका साथ बस यही तक था ।

 अब इनके साथ वे अठखेलियाँ याद आएँगी ,

 वो बक-बक भरी बातें याद आएँगी ,

 वो भीड़ से भरा कॉमन रूम ,

जिसमे एक छक्का पड़ते ही चीखने कि आवाज़ गूंज जाती थी ,

 सब आज जाने को है ।  

अब एक नयी ज़िन्दगी ,

नयी जगह हमारा इंतज़ार कर रही है ,

 सभी के लक्ष्य अलग हैं ,

जानातोसभीकोअपनेरस्तेहीहै।

ज़िन्दगी भी क्या चीज़ है ,

कुछ को पास लाती है ,

 कुछदूरहोजाताहै।

अब तो सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सप्प का सहारा रह जायेगा ,

अबहोंठोंकेबजाय , अंगुलियांऔरअगूंठेचलेंगे।

पर वो कहते है ना ,(कोई और नहीं कहता सिर्फ मै  ही कहता  हूँ);

 

कुछ पाना है तो कुछ खोना पड़ेगा । 

इस दुनिया में हंस हंस के रोना पड़ेगा । 

 

अरे , अभी कुछ ज्यादा भावनाओं में बह गया ,

 पर ख़ुशी भी इस बात की  है कि मैं एक कदम और आगे बढ़ा हूँ ।

 इस ज़मीनी धरातल पर अब अपने पैरों पर खड़ा हूँ ,

दुआ करता हूँ कि इस कॉलेज ने जो मुझे दिया , मैं भी इसको तिनका भर लौटा सकूँ । 

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