नया चुनावी परिदृश्य

इस साल के वोटिंग परसेंटेज को देखकर सभी हैरान हैं , रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड टूटते जा रहे हैं । आखिर इस बार ही ऐसा क्यों हुआ ? हाँ इस बार युवाओं ने खूब हाथ आजमाया है । पर क्या किसी ने भी सोचा था की कभी अपनी समस्याओं में उलझा रहने वाला युवा , आज इतनी बड़ी मात्रा में देश की समस्याओं में रूचि दिखाने लगेगा । आज मेरे दिमाग में ये बातें उथल पुथल कर रहीं थीं । तब मैंने इन गौर करना शुरू किया कि आखिर इस सब की शुरुआत कहाँ से हुई , क्यों युवाओं ने इस बार चुनावी रण में प्रथम पंक्ति की तरह भाग लिया । कई विचार आये मन में , पर सबसे शक्तिशाली विचार अपने प्रभाव से इस कदर प्रभावित कर गया की मेरा मन गदगद हो गया । आपको क्या लगता है , क्या हो सकता है ?
हुआ यूँ कि ये सब सोशल मीडिया की करामात है । इस टेक्नोलॉजी के युग के युवा सोशल मीडिया से इस गहराई से जुड़े हुए हैं , कि अगर आप उनके दिल पर छाप छोड़ना चाहते हैं , तो बस एक बार फेसबुक पर अपनी छाप छोड़ दीजिये । अब वो तलवार तो सोशल मीडिया है, जिसने युवाओं को चुनावी रन में उतरने के लिए मजबूर किया , मजबूर कहना ठीक न होगा बल्कि उत्साहित किया ।  अब बात यह आती है , कि  शुरुआत कहाँ से हुई और किसने की , जरा सोचें तो सिर्फ एक नाम याद आता है , भारतीय जनता पार्टी और कुछ समाचार पत्र । बीजेपी ने ही सबसे पहले सोशल मीडिया पर अपने पैर पसारने प्रारम्भ किये । मैं बीजेपी का कोई बड़ा प्रशंसक या पार्टी का कोई कार्यकर्ता नहीं हूँ मगर ये बात जाने अनजाने में सभी ने स्वीकार की है । अब उस शुरुआत का परिणाम देखिये कि  चुनाव में भाग लेने वाले , मत डालने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है , हाँ इसमें इलेक्शन कमीशन का भी एक बड़ा योगदान रहा है परन्तु चुनाव आयोग का अभियान बहुत काम समय के लिए होता है । ये भी एक तरह से विकास ही है कि  भारत की जनता सही तरीके से अपने मत का उपयोग कर रही है ।
मैं तो इससे हैरान हूँ , कि  पार्टी ने न चाहते हुए भी भारत के युवा में राजनीति की एक लहर दौड़ा दी । आज कल फेसबुक पर लोग अपनी पार्टी या जिसे भी वे सपोर्ट करते हैं , उस पर , उनकी नीतियों पर , स्वच्छ पहलु पर , बुरे पहलु पर बहस करते हैं , देश को इससे लाभ हो रहा है , मेरा तो बस यही मत है । मैं एक उदारवादी व्यक्ति हूँ , प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी रूप से किसी राजनितिक पार्टी का प्रबल समर्थक नहीं हूँ , परन्तु हाँ नरेंद्र मोदी जी का व्यक्तिगत रूप से प्रंशसक भर हूँ , इसके भी बहुत कारण हैं । पर जिस व्यक्ति ने जाने अनजाने में भी देश के लिए भलाई का काम कर दिया , सच में उसका प्रंशसक होने में मैं कोई बुराई नहीं समझता । अब आप देख लीजिये सिर्फ व्हाट्सप्प , फेसबुक का सहारा नहीं लिया गया , ट्विटर और कुछ नए सोशल मीडिया को भी जन्म दिया गया , India272+ ,IndianCAG Group ऐसे ऑनलाइन ग्रुप्स को जन्म मिला , जिन्होंने देश के युवाओं को आपस में जोड़ने का काम किया । अपने विचारों पर बहस करने का एक मंच दिया और सभी को बराबर अवसर दिया । सच में आज सोचने पर ताज्जुब होता है ।
पत्रकारों की बातों को ही लूँ अगर तो उन्होंने भी मन है कि  इस बार चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया ने अपनी खूब भागीदारी निभायी है । और अगर आप सिलसिला यहाँ ख़त्म नहीं करना चाहते तो , आप को बता दूँ , जहाँ तक मैं जनता हूँ , कि  चार – पांच  राज्य जहाँ की राज्य सरकार बीजेपी की है , गुजरात , मध्य प्रदेश ,गोवा ,छत्तीसगढ़ और उड़ीसा (बीजेपी और बी जे दी की गठबंधन की सरकार )। अगर आप इन सभी सरकारों के कार्यकाल और कार्य की एनालिसिस करेंगे तो आप पाएंगे की यहाँ की सरकारें स्थायित्व के साथ -साथ , अपने प्रदेश को विकास के नए रथ बैठाये हुए आगे बढ़ रही हैं ।
पर दुःख इस बात का है की राजनीति कुछ लोग ये दंगो और हिन्दू -मुस्लमान से आगे ही नहीं बढ़ पाये । युवा किसी में भेद नहीं करता , चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम अब वो अपने को भारतीय कहना पसंद करता है । मुझे लगता कि  इस राजनितिक मुद्दे को यही इसी चुनावी माहौल के साथ ख़त्म कर देना चाहिए ।
एक और बात जो मेरे मन है आप के समक्ष रखना चाहूंगा , मैं अरविन्द केजरीवाल जी का भी व्यक्तिगत रूप से प्रंशसक हूँ , पर उनकी नयी पार्टी के कामकाज से अभी तक प्रभावित नहीं हुआ । मैंने सोचा था कि ये कुछ नयी तरह के तरीके अपनाएंगे जनता को प्रभावित करने के लिए , पर ये भी पुरानी नीतियों पर ही चल पड़े हैं । चुनावी माहौल  में दूसरे की गलतियां गिनना , अपनी बड़ाई करना तथा अन्य की बुराई , वर्षों से सब की यही रीति रही है ,अब आप भी यही करोगे , यह उम्मीद नहीं थी । फिर भी केजरीवाल जी का प्रयास सराहनीय रहा है , यह बात लिखने के लिए मैं तो अनुभव में अभी बहुत छोटा व्यक्ति हूँ , पर विचारों के आगे मजबूर हूँ । आशा करता हूँ कि  इस तरह से जो मैं अपनी बात आपके ह्रदय तक पहुँचाना छह रहा था , उसमे सफल रहा होऊंगा ।

जय हिन्द जय भारत ॥

 

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